6376 KM के हाईवे से बदल जाएगी देश की रफ्तार – 80 प्रोजेक्ट्स होंगे HAM में, जमीन अधिग्रहण में दाम हो जाएंगे चौगुने

New Toll Project: सरकार ने टोल प्रोजेक्ट्स के तहत कुल 6376 किलोमीटर लंबाई के हाईवे बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है. इस योजना के तहत कुल 124 हाईवे प्रोजेक्ट्स पर काम होगा, जिनमें से 80 प्रोजेक्ट्स हाइब्रिड एन्नुइटी मॉडल (Hybrid Annuity Model – HAM) में, 32 इंजीनियरिंग-प्रोक्योरमेंट-कंस्ट्रक्शन (Engineering-Procurement-Construction – EPC) मोड में और 12 बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (Build-Operate-Transfer – BOT) मोड में विकसित किए जाएंगे. आइए विस्तार से जानते हैं इन मॉडल्स के बारे में और इस बड़े टोल प्रोजेक्ट का फोकस क्या है.

New Toll Project
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6376 किलोमीटर की लंबाई के प्रोजेक्ट की खासियत

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने 2025-26 के वित्तीय वर्ष में लगभग 3.45 लाख करोड़ रुपये की लागत वाले 124 राष्ट्रीय राजमार्ग प्रोजेक्ट्स के लिए टेंडर जारी करने की योजना बनाई है. इन प्रोजेक्ट्स की कुल लंबाई लगभग 6376 किलोमीटर है. इस टोल प्रोजेक्ट के तहत सड़क निर्माण और सुधार कार्य तेजी से होंगे ताकि देशभर में कनेक्टिविटी बेहतर हो सके.

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New Toll Project: हाइब्रिड एन्नुइटी मॉडल (HAM) क्या है?

HAM मॉडल एक नया कॉम्बिनेशन है जो बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT) और EPC मॉडल के बीच में आता है. इसमें सरकार प्रारंभ में कुल लागत का 40% निर्माण के लिए देती है और बाकी 60% प्राइवेट डेवलपर द्वारा निवेशित किया जाता है. प्राइवेट डेवलपर को इसके बदले में प्रोजेक्ट के संचालन काल के दौरान वार्षिकी (एन्नुइटी) के तौर पर भुगतान मिलता है. कुल मिलाकर HAM मॉडल में सरकार और निजी क्षेत्र के बीच रिस्क और निवेश बाँटा जाता है. इसके साथ ही जमीन अधिग्रहण में लोगों की जमीन के दामों में वृद्धि हो सकती है.

इस साल 80 प्रोजेक्ट्स को HAM मॉडल के तहत लिया जाएगा, जिनकी कुल लंबाई लगभग 4700 किलोमीटर होगी. इस मॉडल को अपनाने का मकसद प्रोजेक्ट्स में तेजी लाना और निजी निवेशकों को आकर्षित करना है.

इंजीनियरिंग-प्रोक्योरमेंट-कंस्ट्रक्शन (EPC) मॉडल

EPC मॉडल में पूरा प्रोजेक्ट सरकार की तरफ से फंड और नियंत्रण में होता है. इस मॉडल में निजी कम्पनियां प्रोजेक्ट के डिजाइन, कच्चा माल खरीदना और निर्माण कार्य पूरी तरह संभालती हैं, लेकिन लागत पूरी सरकारी होती है. सरकार उन्हें निर्माण पूर्ण करने पर भुगतान करती है.

इस साल कुल 32 प्रोजेक्ट्स EPC मॉडल के तहत चलेंगे, जिनकी कुल लंबाई लगभग 616 किलोमीटर है. EPC मॉडल उन जगहों पर फायदा पहुंचाता है जहां सरकार सीधे कार्य प्रबंधन करना चाहती है.

बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT) मॉडल

BOT मॉडल में प्राइवेट कंपनी सड़क बनाने, चलाने और मेनटेनेंस की पूरी जिम्मेदारी संभालती है. कंपनी अपने निवेश की भरपाई टोल कलेक्शन के माध्यम से करती है, आमतौर पर 15 से 20 वर्षों तक. प्रोजेक्ट के समाप्त होने के बाद सड़क का नियंत्रण सरकार को सौंप दिया जाता है.

इस साल 12 प्रोजेक्ट्स BOT मॉडल के तहत होंगे, जिनका कुल लंबाई लगभग 1046 किलोमीटर है. यह मॉडल खासतौर पर उन जगहों के लिए उपयुक्त है जहां निजी निवेशक लंबे समय तक टोल कलेक्शन से लाभ प्राप्त करना चाहते हैं.

टोल प्रोजेक्ट के फायदे

टोल प्रोजेक्ट्स का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भारतीय सड़कों की देखभाल और मेनटेनेंस बेहतर तरीके से हो सकेगी. इन प्रोजेक्ट्स में सरकार और निजी क्षेत्र दोनों निवेश करेंगे, जिससे रिस्क बराबर बंटेगा और काम भी तेज़ी से होगा. इस योजना से देश के अलग-अलग हिस्सों में ट्रैफिक सुविधाएं और कनेक्टिविटी मजबूत होगी. साथ ही बड़े और अहम सड़क प्रोजेक्ट्स जल्दी पूरे होंगे और निवेशकों को टोल से आय मिलने के कारण वे सड़कों की क्वालिटी बनाए रखने में भी दिलचस्पी दिखाएंगे.

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