Gorakhpur Siliguri Expressway: भारत सरकार देश के पूर्वी हिस्से में कनेक्टिविटी को तेज़ करने के लिए एक और मेगा प्रोजेक्ट पर काम शुरू करने जा रही है. गोरखपुर–सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे का निर्माण 568 किलोमीटर की लंबाई में होगा, जो उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल को सीधे जोड़ेगा. इसके बनने से नॉर्थ ईस्ट के लिए यात्रा का समय और दूरी दोनों कम हो जाएंगे.

9 घंटे की बड़ी समय बचत
फिलहाल गोरखपुर से सिलीगुड़ी पहुंचने में करीब 17-18 घंटे लगते हैं, लेकिन इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के बन जाने के बाद यह सफर सिर्फ 8-9 घंटे में पूरा हो सकेगा. इसका मतलब है करीब 9 घंटे की बचत, जिससे व्यापार, पर्यटन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को बड़ा फायदा होगा.
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आधुनिक डिजाइन और हाई-स्पीड लेन
यह एक्सप्रेसवे 6-लेन का होगा, जिसे भविष्य में 8-लेन तक अपग्रेड किया जा सकेगा. इसमें फ्लाईओवर, अंडरपास, सर्विस रोड और टोल प्लाज़ा समेत अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर होगा. हाई-स्पीड डिजाइन के चलते वाहनों की औसत स्पीड 100-120 किमी/घंटा तक रहेगी, जिससे लंबी दूरी की यात्रा बेहद तेज़ और आरामदायक होगी.
आर्थिक और रणनीतिक फायदे
गोरखपुर–सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे सिर्फ यातायात का साधन नहीं, बल्कि यह पूर्वोत्तर भारत और बाकी देश के बीच तेज़ सप्लाई चेन बनाने में अहम भूमिका निभाएगा. इससे उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों में नए इंडस्ट्रियल हब विकसित होने की संभावना है. साथ ही, सीमावर्ती इलाकों में सैन्य और रणनीतिक दृष्टि से भी यह मार्ग महत्वपूर्ण रहेगा.
पूरा होने की समयसीमा
इस एक्सप्रेसवे का निर्माण 2024 के अंत में शुरू होने की उम्मीद है और इसे 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. प्रोजेक्ट की कुल लागत लगभग ₹35,000 करोड़ बताई जा रही है. तैयार होने के बाद यह न सिर्फ गोरखपुर और सिलीगुड़ी के बीच का सफर बदल देगा, बल्कि पूरे ईस्ट इंडिया की अर्थव्यवस्था को भी नई रफ्तार देगा.